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Showing posts from August, 2019

शीतला माता मंदिर

यो म्हारे गाम रिंढ़ाणा(सोनीपत) मैं शीतला माता का मंदिर सै।आइयो भाइयों चैत के महीने मैं,मेला भरया करै ठाडा। वीडियो देखण तहीं लिंक पै क्लिक करो👇 https://youtu.be/9YokEihqikw धन्यवाद। हिन्दी ब्लॉग: mymotive1.blogspot.com अंगरेजी ब्लॉग: reenanarwal.blogspot.com

बूंद-बूंद बचाणी सै...

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बूंद-बूंद बचाणी सै... बूंद-बूंद बचाणी दो दिन गाम मैं पाणी ना आया कति त्राही-त्राही माच गी किसै की रोटी ना बणी किसै की भैंस तसाई मर गी क्यूं री काकी ,क्यूं री ताई इब बात समझ मैं आई? पाणी खाली चालै था थामनै ठूठी ना लवाई भुला दिये वे दिन जब  दोघड़ भरकै ल्याया करती अक घणे चक्कर कट ज्यांगे बूंद-बूंद बचाया करती देखकै बरतो पाणी बालकाँ नै सिखाया करती ईब थामनै सोची अक  पाणी का के टोटा सै दो टैम ठूठी आवै  ना खरचा ए मोटा सै मनै तो थारी बात सुणकै  कसूती सोच आई क्यूं री काकी,क्यूं री ताई ईब बात समझ मैं आई? बीस रपियाँ की ठूठी आज्या अनमोल सै यो पाणी ईब भी समझ ल्यो जै  या जिंदगी सै बचाणी काल पड़ ज्यागा हो ज्यागी आणी-जाणी  गरमी के मैं हलक सूख ज्या मर जावै बिना पाणी खुद भी राखणा ध्यान अर  बालकाँ तै भी समझाणी ना पाणी नै बरबाद करो सै बूंद-बूंद बचाणी ईब भी जै ना समझे तो  पड़ैगी मोटी रकम चुकाणी एक बात नै गाँठ बाँध ल्यो सै बूंद-बूंद बचाणी...  यू ट्यूब पै सुणणी हो तो: क्लिक क...

म्हारा मोंटी म्हारी गेल होता

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म्हारा मोंटी म्हारी गेल होता  म्हारा मोंटी म्हारी गेल होता  काल मोंटी का जनमदिन था  जनमदिन के कसूता दिन था  धूम-धड़ाका अर ढोल बाजै था  अर मोंटी कसूत नाचै था  यार दोस्त हर कोए माचै था  जो आवै था काचै काटै था घर क्याँ नै भी कसर ना छोड्डी  अर मोटरसाइकल देकै ए छोड्डी  लेकै चाबी मोंटी उछल पड्या  अर केक लेण चाल पड्या  माँ हेलमैट लेकै आई, बोली~ ए बेटा! थोड़ी ध्यान तै जाइये  केक लेकै आराम तै आइए  पर मोंटी मैं जोश कसूता आ रह्या था  पारटी का भूत सर पै छा रह्या था  क्यूं री माँ इतनी डरया करै  खामखाँ चिंता करया करै  मैं इब गया अर ईब आया  क्यूं लोग हेलमैट का बोझ मरया करैं  माँ बोलती रहगी पर मोंटी अकड़ ग्या  सपीड खींच दी अर दूर लिकड ग्या  दस मिनट का राह था रात होगी  माँ चिंता मैं, बेरा ना रे बात होगी  रै होणा के था  जिसका डर था वा ए बात होगी  मोंटी के जीवन की काली रात होगी  रै मोंटी तू यो के कर ग्या, आप...

आजकाल के बालक घणे बिगड़ ग्ये

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आजकाल के बालक घणे बिगड़ ग्ये  आजकाल के बालक घणे बिगड़ ग्ये  साँझ का टैम था  ताऊ गाल मैं खाट घाल रह्या था  अर आज तो चुपचाप बैठ्या  कुछ सोचण लाग रह्या था  मन्नै पूछ ली ~ताऊ के बात होगी?  ताऊ बोल्या~ए बेटी! पूछै मतना  आज मेरा शहर मैं जाणा होग्या  यो जमान्ना जरूत तै घणा स्याणा होग्या  कॉलेज आगे कै जब मैं लिकडण लाग्या  तो गाम के बालकाँ नै देख पढते देख  मेरा सीन्ना चौड़ा होग्या, पर बेटी!  वा खुशी घणी देर ना टिकी  अर मेरी उम्मीदाँ पै पाणी फिरग्या  अर साच्ची पूछै ना तो  मेरा आजकाल के बालकाँ तै जी उतरग्या  मन्नै पूछी ~ताऊ इसा के होग्या?  ताऊ बोल्या ~के बताऊँ बेटी!  तेरी उमर के बालक कॉलेज तैं लिकडण लागरे  उनकी बाताँ तै बेरा पाट्या अक कलास छोड़ कै  अर फिलम देखण जाण लाग रे थे  मेरे तै ना डट्या गया  मैं बोल्या~रै बालकों!  इसी के वा फिलम न्यारी होगी  जो थामनै इस हकीकत तै प्यारी होगी? अक थारा बाब्बू थामनै करजा लेकै पढ...