बूंद-बूंद बचाणी सै...
बूंद-बूंद बचाणी सै...
दो दिन गाम मैं पाणी ना आया
कति त्राही-त्राही माच गी
किसै की रोटी ना बणी
किसै की भैंस तसाई मर गी
क्यूं री काकी ,क्यूं री ताई
इब बात समझ मैं आई?
पाणी खाली चालै था
थामनै ठूठी ना लवाई
भुला दिये वे दिन जब
दोघड़ भरकै ल्याया करती
अक घणे चक्कर कट ज्यांगे
बूंद-बूंद बचाया करती
देखकै बरतो पाणी
बालकाँ नै सिखाया करती
ईब थामनै सोची अक
पाणी का के टोटा सै
दो टैम ठूठी आवै
ना खरचा ए मोटा सै
मनै तो थारी बात सुणकै
कसूती सोच आई
क्यूं री काकी,क्यूं री ताई
ईब बात समझ मैं आई?
बीस रपियाँ की ठूठी आज्या
अनमोल सै यो पाणी
ईब भी समझ ल्यो जै
या जिंदगी सै बचाणी
काल पड़ ज्यागा
हो ज्यागी आणी-जाणी
गरमी के मैं हलक सूख ज्या
मर जावै बिना पाणी
खुद भी राखणा ध्यान अर
बालकाँ तै भी समझाणी
ना पाणी नै बरबाद करो
सै बूंद-बूंद बचाणी
ईब भी जै ना समझे तो
पड़ैगी मोटी रकम चुकाणी
एक बात नै गाँठ बाँध ल्यो
सै बूंद-बूंद बचाणी...
यू ट्यूब पै सुणणी हो तो:क्लिक करो
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अंगरेजी ब्लॉग :reenanarwal.blogspot.com
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