म्हारा मोंटी म्हारी गेल होता म्हारा मोंटी म्हारी गेल होता काल मोंटी का जनमदिन था जनमदिन के कसूता दिन था धूम-धड़ाका अर ढोल बाजै था अर मोंटी कसूत नाचै था यार दोस्त हर कोए माचै था जो आवै था काचै काटै था घर क्याँ नै भी कसर ना छोड्डी अर मोटरसाइकल देकै ए छोड्डी लेकै चाबी मोंटी उछल पड्या अर केक लेण चाल पड्या माँ हेलमैट लेकै आई, बोली~ ए बेटा! थोड़ी ध्यान तै जाइये केक लेकै आराम तै आइए पर मोंटी मैं जोश कसूता आ रह्या था पारटी का भूत सर पै छा रह्या था क्यूं री माँ इतनी डरया करै खामखाँ चिंता करया करै मैं इब गया अर ईब आया क्यूं लोग हेलमैट का बोझ मरया करैं माँ बोलती रहगी पर मोंटी अकड़ ग्या सपीड खींच दी अर दूर लिकड ग्या दस मिनट का राह था रात होगी माँ चिंता मैं, बेरा ना रे बात होगी रै होणा के था जिसका डर था वा ए बात होगी मोंटी के जीवन की काली रात होगी रै मोंटी तू यो के कर ग्या, आप...