आजकाल के बालक घणे बिगड़ ग्ये
आजकाल के बालक घणे बिगड़ ग्ये
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| आजकाल के बालक घणे बिगड़ ग्ये |
साँझ का टैम था
ताऊ गाल मैं खाट घाल रह्या था
अर आज तो चुपचाप बैठ्या
कुछ सोचण लाग रह्या था
मन्नै पूछ ली ~ताऊ के बात होगी?
ताऊ बोल्या~ए बेटी! पूछै मतना
आज मेरा शहर मैं जाणा होग्या
यो जमान्ना जरूत तै घणा स्याणा होग्या
कॉलेज आगे कै जब मैं लिकडण लाग्या
तो गाम के बालकाँ नै देख पढते देख
मेरा सीन्ना चौड़ा होग्या, पर बेटी!
वा खुशी घणी देर ना टिकी
अर मेरी उम्मीदाँ पै पाणी फिरग्या
अर साच्ची पूछै ना तो
मेरा आजकाल के बालकाँ तै जी उतरग्या
मन्नै पूछी ~ताऊ इसा के होग्या?
ताऊ बोल्या ~के बताऊँ बेटी!
तेरी उमर के बालक कॉलेज तैं लिकडण लागरे
उनकी बाताँ तै बेरा पाट्या अक कलास छोड़ कै
अर फिलम देखण जाण लाग रे थे
मेरे तै ना डट्या गया
मैं बोल्या~रै बालकों!
इसी के वा फिलम न्यारी होगी
जो थामनै इस हकीकत तै प्यारी होगी?
अक थारा बाब्बू थामनै करजा लेकै पढावै सै
सारे ठाठ कर राख्ये थारे
अर खुद रूखी-सूखी खावै सै
अर थाम उसकी मेहनत पै पाणी फेरो
थामनै थोड़ी -ब्होत शरम आवै सै?
अर वा थारी माँ...
लामणी करण लाग री होगी
लू चाल्लै, घाम मैं तपण लाग री होगी
फेर भी थारे तै या उम्माद राख री होगी
अक मेरे बालक पढकै आवैंगे
अर उन्नै भूख लाग री होगी
अर न्यूं बता दयो यो पिज्जा के न्यारा होग्या
जो थारी माँ के हाथ के चूरमें तै आज प्यारा होग्या
अर ये दो बात कही थी
कसर उनकै भी नहीं रही थी
किसै का भी साँस नहीं पाट्या
नजर झुकगी अर छा ग्या सन्नाटा
मेरी बात सुणकै धरती मैं गडग्ये
टूटे पायाँ कॉलेज मैं बडग्ये
अर न्यूं ना सोचिये सबकी आँख खुलगी
कुछ तो फेर भी अकड़ ग्ये
अर आजकाल के बालक तो
घणे बिगड़ ग्ये, घणे बिगड़ ग्ये...

Very nice
ReplyDeleteThank you 😊
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